May 27, 2024
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Election अप्रत्याशित है यह प्रचंड जीत

भाजपा ने तीन राज्यों में जिस तरह क्लीन स्वीप किया है वह कई मायनों में अप्रत्याशित इसलिए है क्योंकि न मध्यप्रदेश में यह माना जा रहा था कि जीत का अंतर सौ सीटों तक पहुंच सकता है और न छत्तीसगढ़ में साफ बहुमत आता नजर आ रहा था बल्कि वहां तो यही कयास थे कि कांग्रेस सरकार बचा ले सकती है भले थोड़े जोड़ तोड़ के साथ ऐसा करना पड़े. राज्स्थाना में जादूगर गहलोत इस तरह पिटेंगे इसका भी कोई अनुमान नहीं लगा रहा था हालांकि यह तय था कि भाजपा को जितााने का मन मतदाता ने बना लिया है लेकिन इस तरह पटक पटक कर धोने जैसे हालात की कल्पना नहीं की जा रही थी. रराजस्थान में कांग्रेस सौ सीटों को तरस गई और मध्यप्रदेश में 75 का आंकड़ा छूना ही उसके लिए बुरे सपने जैसा हो गया. छत्तीसगढ़ ने कांग्रेसी खेमे में सुबह उम्मीदें जगाई थीं लेकिन क्या पता कौन सी ‘पनौती’ ने दिल्ली में बैठे यहां का हाल देख लिया और यहां भी हालत बुरे हो गए. सवाल यह भी है कि यदि राहुल की कथित पैदल की गई भारत जोड़ो यात्रा ने थोड़ा दम नहीं दिया होता तो क्या संभव इकाकई अंकों में ही सिमटने को तैयार बैठी थी इन तीनों राज्यों में? तेलंगाना का बहुमत ठीक वैसे ही होगा जैसे किसी जले घाव पर थोड़ा मरहम लगा दिया जाए लेकिन वहां से कांग्रेस को कोई दिशा मिल सकेगी यह सोचना नादानी होगी यानी हाल फिलहाल के लिए कांग्रेस के सारे अरमां आंसुओं में बह गए हैं और बड़ी बात यह भी है कि न वह अपने राज्यों में अपने प्रदर्शन से लोगों का दिल जीत पाई और न उन राज्यों में भाजपा से लोगों का मोहभंग कर पाई जहां बीजेपी को सत्ता में लगभग दो दशक पूरे हो रहे हैं. इस तरह कांग्रेस विपक्ष के तौर पर भी असफल रही और सत्ता संभालने के नाते भी फिसड्‌डी ही सारबित हुई. कुछ भाट चारण यह समझणने में गले हुए थे कि अब केंद्र से लेकर निचले पायदान तक भाजपा है तो स्वाभाविक एंटी इन्कंबैंसी कांग्रेस के पक्ष में जानी है इसलिए कांग्रेस भले कुछ भी न करे तो भी उसे भले सत्ता न मिले लेकिन सीटों का फायदा हो जाएगा. इन नतीजों से कांग्रेस जितनी सदमे में है उससे ज्यादा तो रवीशनुमा यूट्यबर हताश हैं जिनकी रोजी रोटी कांग्रेस और कांग्रेसियों के बीच झूठ सच चला चलाकर ही मिल जाती थी. इनके सारे अनुमान और एक्सपर्टाइज पर चुनावी नतीजे तभी से पानी फेरते आ रहे हैं जब से मोदी शाह ने भाजपा को संभाला है लेकिन इस बार झटका ज्यादा बड़ा है. जिन्हें भोली उम्मीद है कि कांग्रेस इन नतीजों से कोई सकारात्मक सबक लेकर अगले साल का बड़ा चुनाव लड़ेगी उनके लिए शुभकामना लेकिन हम जैसों को तो एक प्रतिशत भी उम्मीद नहीं कि कांग्रेस इन नतीजों से कोई सबक लेना चाहती है बल्कि डर यही है कि वह अब अल्पसंख्यक वोटबैंक को मजबूती से पकड़ने के लिए नई बेवकूफियां करेगी, काश ऐसा न हो….