May 27, 2024
राष्ट्रीय

ऐसे मुद्दों पर तो तुष्टिकरण से बचें


विदेशी धरती पर चल रही घटनाओं पर अब सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं. हमास के इजराइल पर हमले की निंदा करने में मोदी सरकार अव्वल रही तो कांग्रेस से थरूर की आवाज आई कि हम हमास को आतंकी नहीं मान सकते और उसके बाद तो भारत में जुबानी जंग ही चालू हो गई, कांग्रेस फिलिस्तीन के साथ है और मोदी इजरायल के पक्ष में मजबूत हैं.
हमास को आइसिस के बराबर खड़ा करने वाले ज्यादा हैं लेकिन कुछ आवाजें वो हैं जो इस “युद्ध जैसी” स्थिति के ऐतिहासिक कारणों में जाने की सलाह देते हैं. वाकई यह लंबा सिलसिला रहा है. हमास को कई मुस्लिम देशों का समर्थन है और जिस फोटो को लेकर हमास भड़का है वह इजराइल और अरब देशों के बीच बेहतर रिश्तों वाला फोटो ही था. हमास के हमले को मुस्लिम स्वाभिमान से जोड़ने वेल भी कई मुस्लिम राष्ट्र है.
अब विषय इतने बड़े वोट बैंक से जुड़ा हो तो उसका राजनीतिक उपयोग करने में कॉंग्रेस और भाजपा दोनों ही पीछे नहीं रहना चाहते. पाँच राज्यों में जब विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी हो और लोकसभा चुनाव भी कमोबेश सिर पर ही हों तो ऐसे मौसम मे हमास और इसराइल पर दोनों बड़े दलों के बीच आमने सामने की संभावना होनी ही थ

मुस्लिम समुदाय एकमुश्त वोटिंग करने वाला वोट बैंक माना जाता है. भारत सरकार ने जो प्रतिक्रिया दी उसका मूल यही है कि आतंकवाद के हर रूप को भारत नापसंद करता है.

भारत ने आतंकवाद इतने रूपों में झेला है कि जो स्वरूप दुनिया को नया लगता है कमोबेश हर वह रूप हमारा देश पहले ही झेल चुका है.

सरकार और विपक्ष मे बाकी जिस तरह ‘सैद्धांतिक समर्थन’ दिया है उसे भाजपा कांग्रेस द्वारा आतंक के समर्थन और तुष्टिकरण बतौर रखना चाहती है.

जाहिर है तुष्टिकरण से राजनीतिक लाभ भले कितना लिया जा चुका हो लेकिन मुस्लिमों को उनके हाल पर ही छोड़ा गया है. विकास की लगभग हर कसौटी पर यह समुदाय पीछे ही दिखेगा.

कांग्रेस ने हमास को लेकर जो सोच सामने रखी है वह तुष्टिकरण के लिए है या नहीं यह भले वह साफ साफ न कहे लेकिन उसका ट्रेक रेकॉर्ड यही बताएगा कि उसकी सोच में ही यह शामिल है. सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर तुष्टिकरण एक ग़लत परंपरा हो सकती है लेकिन किया यही जा रहा है. कांग्रेस नेता तो पीएफआई तक के खिलाफ छापों पर सवाल उठा रहे हैं.

देश, विदेश नीति वग़ैरह पर विपक्ष के रूप में बीजेपी इससे बचती रही है ताकि दुनिया के सामने तो सही संदेश जाए. इजरायल मामले में कांग्रेस या कहें आईएनडीआईए ने जो रुख़ अपनाया वह कोई अच्छा संकेत तो नहीं दे रहा है और कमाल देखिए कि इज़राइल में नेतन्याहू को नापसंद करने वेल भी फिलहाल उनके साथ खड़े हुए हैं.

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