June 17, 2024
लाइफस्टाइलफ़ूड ज़ोन

बचिए फास्ट फूड के स्वादिष्ट जंजाल से

आलेख- डॉ. अनिल भदौरिया

फास्ट फूड की परिभाषा तो यही है कि वह त्वरित उपलब्ध हो जाए और फटाफट भूख मिटा दे लेकिन इस जल्दी के पीछे स्वास्थ्य का नुकसान भी छुपा हुआ है. इस आधुनिक युग में नाना प्रकार के फास्ट फूड उपलब्ध हैं जिन में भारतीय, चाइनीस, ओरिएंटल, कॉन्टिनेंटल, थाई, तिबेतन, इटालियन फास्ट फूड की एक बड़ी मात्रा हम भारतीयों द्वारा उदरस्थ कर ली जाती है. यहां प्रश्न यह है कि आखिर फास्ट फूड इतनी पसंद क्यों किए जाते हैं? नूडल्स, मोमोज, पिज़्ज़ा, पास्ता, फ़्रैंच फ्राईस, केक, बर्गर जैसी चीजों की डिमांड लगातार बढ़ रही है. फास्ट फूड जितना बच्चों को पसंद आते हैं उतना ही नौकरपेशा, यात्रीगण, व्यवसायी, खिलाड़ियों और यहां तक की बुजुर्गों की जिव्हा और आमाशय में भी आसानी से स्थान प्राप्त जाते हैं. ऊर्जा के कथित बूस्टर डोज के ब्रह्मजाल में उलझते हुए यह चटखारेदार फास्ट फूड मानव की जिव्हा पर उपस्थित स्वाद ग्रंथियां के वशीभूत हो ऐसी लत लगा बैठते हैं कि इन फास्ट फूड या जंक फूड की आदत छुटाये न छूटे.

आमतौर पर फास्टफूड के पोषक पदार्थ से उत्तम गुणवत्ता के तत्वों की प्राप्ति हो ना हो इन फास्टफूड के गरमा-गरम खट्टे-मीठे, तेज नमक के साथ शर्करा के भोजन के तत्वों के समावेश में ऐसी लत लग जाती है जैसे मछली भोजन के कांटे मे बिंध जाती है.

फास्ट फूड की लत का कारण-
यह तेज स्वाद के उत्पाद तेज गति से मस्तिष्क में भोजन के प्रति संतुष्टि का प्रभाव तो प्रस्तुत करते ही हैं और अधिक मात्रा की मांग भी उत्पन्न करते हैं और मेन कोर्स का भारतीय संस्कृति का मेनू तो पिछड़ ही जाता है परंतु यह फास्ट फूड कब्जा-सच्चा की भांति स्थापित हो जाते हैं वह भी प्रतिदिन की आवृत्ति पर जो नाश्ते के समय हो सकती है अथवा शाम के समय चाय के साथ हो सकती है.

आखिर क्यों?
यह फास्ट फूड सोडियम, कोलेस्ट्रॉल, ब्रॉमिनेटेड वनस्पति तेल के साथ-साथ पोटेशियम ब्रोमेट, संतृप्त वसा, शोधित आटा यानी मैदा और उच्च स्तरीय शक्कर के साथ साथ प्रोफाइल पैराबेन, रेड आई 3, टाइटेनियम डाइऑक्साइड से बनते हैं. डीप फ्राई करने के लिये जो तेल प्रयोग में लगातार लय जाता है उसमें ट्रांस फैट उपस्थित हो जाते हैं जो बीमारी का कारण बन सकते हैं. फास्ट फूड्स का पाचन करने में शरीर को अधिक ऊर्जा का व्ययन करना होता है. हालांकि ये केमिकल तत्व इन फास्ट फूड या जंक फूड को स्वादिष्ट भी बनाते हैं. संभवत इन्हीं तत्वों और वसा से बच्चों में मोटापा अधिक होता है. अधिक दिनों तक ऐसे फास्ट फूड उत्पादों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए जिन रासायनिक प्रिजर्वेटिव का प्रयोग होता है, वह भी हानिकारक हो सकते हैं. कई पेय पदार्थ में तो सुक्रालोज या सेक्रीन जैसी शक्कर के पूरक पदार्थ का समावेश होता है जो साधारण शक्कर से कई सैकड़ो गुना तक मीठी होती हैं. यह रासायनिक तत्व कदाचित कारक तत्व होते हैं इन फास्ट फूड की लत लगाने के जो छुटती नहीं है तभी इससे कुछ लाइलाज रोग जैसे कैंसर, तंत्रिका तंत्र में कमजोरी होने की संभावना तो होती ही है पागलपन के दौरे और अन्य मानवीय व्यवहारों में परिवर्तन की स्थितियां उत्पन्न होने की संभावनाएं बनती जाती हैं.

तो कैसा भोजन है स्वास्थ्यवर्धक?
कच्चा और अंकुरित भोजन अमाशय एवं आतों में शीघ्र पच जाता है यानी जो भोजन शीघ्र पचता है तो आंतों में उसका अवशोषण भी शीघ्र होता है और शरीर में फुर्ती बनी रहती है.
सीधी आंच में पका भोजन पदार्थ जैसे बाटी, रोटी, सामिष भोज या भाप में पका भोजन या ग्रिल पर सेंक कर बनाया गया भोज्य पदार्थ स्वास्थ्य वर्धक होते हैं. घर में बनाए गए, दाल- चावल, रोटी हरी पत्तेदार सब्जियां, मट्ठा से बनी कढ़ी, आलू प्याज का सब्जियों में समावेश भारतीय भोजन शैली का प्रतीक तो है ही भारतीय मसाले के मिश्रण से घर का बना भोजन न केवल स्वादिष्ट बनता है बल्कि कई सूक्ष्म मात्रा में अनिवार्य मिनरल्स का स्रोत भी बनता है.

आवश्यकता क्या है
फास्ट फूड या जंक फूड दोनों ही क्षुधा याने भूख शांति की तुरंत पूर्ति के लिए सड़क किनारे स्थित किसी भी किराना-दुकान, ढाबा, होटल, रेस्टोरेंट आदि से प्राप्त किए जाते हैं जिनके भोज्य उत्पादों की गुणवत्ता सदैव ही संदिग्ध होती है क्योंकि इन उत्पादों का कच्चा माल सदा ही सस्ता लाया जाता है ताकि लाभ का प्रतिशत अधिक हो. आवश्यकता इस बात की है कि घर के बने भोजन का ही प्रयोग नाश्ते एवं भोजन में किया जाए, भले ही घर से टिफिन क्यों ना ले जाना पड़े. यदि ऐसा हम कर पाए तो संभावित हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा आदि से हमारी संततियों की रक्षा हो पाए. एंटी ओक्सिडेंट के प्रचुर स्त्रोत होते हैं फल जो प्रतिदिन भोजन में लेने की सलाह भी दी जाती है