February 24, 2024
साहित्य

Book Review गुलाबी अक्षर जो आईना भी हैं

किताब-हथेलियों पर गुलाबी अक्षर

रचनाकार- स्मृति आदित्य

बुक रिव्यू- श्रावणी सुळ

प्रकाशन- सृजन बिंब

कीमत- 175 रुपए

स्मृतिजी के स्वभाव में जो पारदर्शिता हैं वह उनकी लेखनी में साफ झलकती है. बड़ी सहजता से वह दिल की गहराइयों को कागज़ के तल पर बिखेर देती हैं और शब्दों की वह खूबसूरत रंगोली कविता कहलाती हैं.। इन कविताओं में एक बेटी अपनी माँ के लिए प्यार और सम्मान व्यक्त करती है, एक प्रेमिका अपने प्रेमी को प्रेम की विभिन्न कच्ची पक्की छटाओं की शब्दरुप बरखा से सींचती है. एक पत्नी अपने पति पर जान देने के जज्बे के साथ नजर आती है और उसके साथ जिंदगी का खूबसूरत चित्र सजाती है. जिसमें प्रेम, साथ और विश्वास की अनुभूति हो। एक स्त्री अपने मन की मुक्त अभिलाषा व्यक्त करती है तथा अन्य स्त्रियों को अपनी ही तरह उड़ान भरने को प्रेरित करती है. यह किताब इस बात की खातरी है कि किस तरह एक कवयित्री कविमन की उलझन को और हर कवि के कविता तक का रास्ता तय करने वाले आंतरिक सफर को बड़ी खूबसूरती से बयां करती है. इस तरह यह किताब मनुष्य के जीवन के सारे किरदारों की मनोदशा का सुरेख चित्रण करती है, हथेलियों पर स्वच्छ भावों के गुलाबी अक्षर समेटकर दिल की अंजुरी में रखी यह कविताएं किताब को सौंपकर उन्हें उनका सही स्थान देने के लिए स्मृतिजी को ढेरों बधाई!

स्मृतिजी की कविताओं में चाँद के लिए जो बेहद प्यार झलकता हैं, उसे अगर चांद रश्मियां पढ़ ले तो उन्हें ईर्ष्या तो जरूर होंगी! कहीं उनकी कविताए चाँद को समर्पित हैं तो कहीं चाँद उनकी कविताओं के लिए समर्पित हैं. रात के दामन में चाँद की रोशनी में जब कोई काव्यप्रेमी उनकी चाँद को समर्पित कविताएं पढ़ता हैं तो उसका मन कहता है कि काश उसका अपना भी कोई चाँद होता जिसे यह खूबसूरत शब्द पढ़ते वक्त इसी शिद्दत से खूब याद किया जाता. अपनी कविताओं में स्मृतिजी जीवनरस के कड़वे घूँट शहद में घोलकर पी जाती हैं. जीवन के सच को स्वीकार कर मन के स्वप्न को साकार करने का प्रयास करती हैं. अपने हर किरदार को बड़ी बखूबी से साझा करती हैं। इसलिए यह किताब दिल का आईना ज्यादा नजर आती है.