June 14, 2024
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Shiv की अगली नगरी दिल्ली तो नहीं

मध्यप्रदेश में नए मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर जिस तरह भाजपा ने आखिरी समय तक सस्पेंस बनाए रखा वही हाल अब शिवराज के भविष्य को लेकर भी है. मोहन यादव को चुने जाने से पहले जितने नाम इस बार मुख्यमंत्री के लिए चले उनमें से किसी को भी इस पद तक पहुंचने नहीं दियागया और इस फेर में प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज भी मात खा गए. प्रहलाद पटेल के घर पर तो पूरी तैयारियां तक कर ली गई थीं लेकिन दिल्ली का इशारा ही कुछ और था और उस इशारे के चलते मुख्यमंत्री पद मालवा के हिस्से आ गया लेकिन अब सवाल उन सब के ‘प्लेसमेंट ‘ को लेकर है जिनको उनके समर्थक सीएम मान ही चुके थे. इसमें सबसे पहला नाम शिवराज सिंह चौहान का ही है जिन्हें रिपीट होते देखने की उम्मीद में सिर्फ लाड़ली बहनाएं ही नहीं थीं बल्कि उनके समर्थक और काफी सारी ब्यूरोक्रेट्स भी थे. मोदी उन्हें अपने केबिनेट में ले लें यह आसान नहीं है और उन्हें मध्यप्रदेश की कमान इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे सत्ता के एक से ज्ल्यादा केंद्र होने का खतरा बढ़ेगा. उन्हें यदि समायोजित करना ही पड़ा तो संगठन में ही उनकी भूमिका हो सकती है क्योंकि संघ का साथ उन्हें रास आता है और इसी कृपा से वे इतने समय तक सत्ता में रह सके. केंद्र से आए नरेंद्र सिंह तोमर का ही पुनर्वास विधानसभा अध्यक्ष के रूप में हो पाया है बाकी वे सभी सांसद जो सांसदी और मंत्री पद तक छोड़कर आए हैं अब इस इंतजार में हैंं कि उनके लिए शाह मोदी की जोड़ी ने क्या तस कर रखा है और वह उन्हें कब मिलेगा. शक्ति प्रदर्शन करने में इस बार काफी सारे गुट आगे रहे और उन सभी का कहीं न कहीं राजनीतिक पुनर्वास भी करना ही होगा वहीं कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता भी हैं जिन्हें बड़ी चुनौती दी गई थी कि वे पहले सफल होकर बताएं और यह परीक्षा उन्होंने बहुत ही अच्छे अंकों से पास कर ली है इसलिए उनके लिए भी कुछ तो सोचना ही होगा. जिन्होंने दिग्गज कांग्रेसियों को हराया उन्हें भी ईनाम की उम्मीद है और वे भी काफी सारे हैं जो तीन चार बार से सिर्फ विधायकी संभाल रहे हैं लेकिन सत्ता में कोई दूसरी भागीदारी जिन्हें नहीं मिली है. ज्याेति सिंधिया एंड कंपनी का अपना दावा है और इस दावे में भी बराबरी की भागीदारी वाला संपुट जुड़ा हुआ है. यदि भाजपा ने मुख्यमंत्री चुनने में सप्ताह भर से ज्यादा का समय लगाया है ताे निश्चित ही इन सारे फैटर्स पर काफी मंथन हो चुका होगा लेकिन इसके तथ्यों और नतीजों के पत्ते वैसे ही छुपाकर रखे गए हैं जैसे मोहनन यादव का नाम ऐन वक्त तक पर्दानशीं रखा गया था और प्रदेश की जनता के लिए यह तो जानने की रुचि आज ही है कि सीएम रहने के बाद शिव की अगली नगरी कहां बसेगी.