May 27, 2024
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नये का वादा, नाम पुराने

विधानसभा चुनाव के लिए 144 प्रत्याशियों की कांग्रेस लिस्ट कमलनाथ और दिग्विजय की ही चलने का सबूत पेश कर रही है है. दूसरे लगभग सारे गुट या तो दरकिनार हैं या बमुश्किल कुछ पा सके हैं. इस सूची को देख कर कहा जा सकता है कि नये का वादा कितना भी किया गया हो लेकिन इसमें नाम ही नहीं सारे तौर तरीके भी पुराने ही हैं. वर्तमान विधायकों को मौके देने के फेर में उन्हें भी टिकट मिल गया जिनकी छवि खराब है. न इसमें महिलाओं को वरीयता देने की सोच है और न नयों को टिकट देकर हिम्मत दिखाने का ही रिस्क दिखता है. सब कुछ उसी पुराने तौर तरीके के मुताबिक.

कॉंग्रेस नेता एससी, एसटी की आरक्षित सीट वालों को जोड़कर बता रहे हैं कि इन्हें भी टिकट दिया गया है लेकिन कोई यह बताने को तैयार नहीं है कि सामान्य सीट पर इन वर्गों से कितनी टिकट दी गयी हैं क्योंकि आरक्षित सीट पर तो उस वर्ग को टिकट देना मजबूरी ही है.
कांग्रेस के पास मौका था कि वह अपनी सूची से ओबीसी और महिलाओं के प्रति कही गयी बातों को हक़ीकत मे कर दिखती कि वाकई हम इनका भला चाहते हैं.

असंतोष की चिंगारी भड़काने के लिए भी यह सूची काफ़ी सहायक साबित होगी जब कांतिलाल भूरिया को न देकर उनके बेटे को टिकट दिया जाता है तो यह साफ हो जाता है कि सीएम पद की उम्मीदवारी से बाकी गुयतों के पत्ते किस तरह काटे गये हैं.
कमलनाथ और दिग्विजय मिलजुलकर आधे से ज़्यादा सीट पर अपने प्रत्याशी लाए हैं जबकि बाकी सारे बड़े नेता आधे से कम मे हिसस्दर रहे हैं.
जिन्हें नये खून की उम्मीद थी उन्हें भी निराश होना पड़ा है और जो तुष्टिकरण के सहारे टिकट की कतार में थे उन्हें भी झटका लगा है.