May 27, 2024
दर्शन

उल्लास और 10 का नियम

डॉक्टर अनिल भदौरिया

कहा जाता है कि उदास मन से दुनिया की दौलत और प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य भी उदास लगता है. सत्य तो यही है कि दौलत हो, ना हो, प्रकृति का मां जैसा रूप, सदा से उल्लास और जन्म मृत्यु का प्रतीक है.

उदास मन हो तो चेहरे की 62 मांसपेशियां तनाव की स्थिति में रहकर ब्लड प्रेशर बढ़ने में सहायक होती हैं. और उदास मन ही नेगेटिव शब्दों का स्रोत तो होते ही है तथापि खीज, क्रोध, अवसाद और गलत निर्णय का भी सृजन करते हैं. कालांतर में उदास मन और उदासीन मानसिकता, ग्लानि और पश्चाताप का सामना करने को प्रस्तुत होते हैं.

इसके उलट, मुस्कुराइये, की अवस्था प्रीतिकर है जो उदास मन को भी उदासी के कुएं से बाहर ले आती है. अनायास या प्रयास करने पर लाई गई मुस्कान चेहरे की 26 मांसपेशियों के द्वारा ही प्राप्त हो जाती है और जीवंत खुशी या उल्लास या हर्ष के हार्मोन को रक्त में घोल देती है. खुशी के हार्मोन, प्रचुर मात्रा में शरीर में उपलब्ध हों इस हेतु हर्ष और उल्लास का 10 का नियम का पालन प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए तो उसे न केवल हर्ष के हार्मोन प्रचुर मात्रा में रक्त में प्राप्त होंगे बल्कि तनाव के हार्मोन भी न्यून स्तर पर शरीर में बने रहेंगे.

हर्ष और उल्लास के हार्मोन प्रचुर मात्रा में शरीर में उपलब्ध हो तो हो इस हेतु हर्ष और उल्लास का 10 का नियम –

  1. नियमित व्यायाम तथा खेलकूद का समावेश
    (प्रतिदिन)
    (योग, पैदल 10000 पग)
  2. सूर्य का स्नान
    (प्रातः का धूप स्नान)
  3. संतुलित भोजन
    (प्रचुर जल के साथ)
  4. पर्याप्त निंद्रा
  5. मुस्कुराने का उपक्रम
    करें बात या बिना बात. (सक्रिय या निष्क्रिय)
  6. ध्यान का अभ्यास
    (एकल या समूह में)
  7. परिवार बड़ा करें – पौधे लगायें, बाग़वानी करें, जंतु पालें उनकी देखभाल करें
  8. परिवार प्रेम प्रदर्शन
  9. एक मंदिर गोद लें, स्कूल या अनाथालय को सहायक हों .
  10. सदा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ छोटी छोटी यात्रा करें

इन नियमों के पालन से अच्छे हार्मोन तनाव के हार्मोन पर सदैव हावी रहेंगे और मानसिक रोगों से बचाव भी हो सकेगा

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