February 24, 2024
बिजनेस

China का आबादी पैटर्न है भारत के लिए सीख

चीन के सामने जो चुनौतियां हैं उनमें आबादी के पैटर्न की समस्या सबसे बड़ी है। यहां बुजुर्गों की आबादी ज्यादा है और जन्म दर बेहद कम हो चुकी है। महिला-पुरुष अनुपात असंतुलन भी है।

एक समय में यह दौर जापान देख चुका है जब 90 के दशक में यहां तीन दशकों तक हालात ठीक नहीं थे। जापान अब थोड़े सुधार पर है लेकिन वहां भी बड़ी उम्र के चलते उत्पादकता प्रभावित हुई है. चीन की चिंता इसलिए बड़ी है क्योंकि उसका दायरा बहुत बड़ा है.

जापान में 1990 के दशक से लगभग 12.5 करोड़ की स्थिर आबादी है। यहां का कार्यबल भी लगभग 6.9 करोड़ के स्तर पर स्थिर है लेकिन उम्रदराज होने की वजह से समय के साथ लोगों की उत्पादकता कम हो गई है। चीन में 1.4 अरब लोग हैं और उनमें कार्यशील लोग 75 करोड़ हैं। चीन में अगले 10 साल में उम्र के चलते 5 करोड़ आबादी से कम होंगे और अगले पच्चीस साल में लगभग 10 करोड़ लोग वृद्ध मौत होंगे। ऐसे में कार्यबल में तेजी से कमी आना तय है।

चीन कभी उच्च आमदनी के स्तर तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो सका क्योंकि यहां बुजुर्ग ज्यादा हैं।

इन सबसे भारत को सबक लेने चाहिए। भारत में महिलाओं की कार्यशील भागीदारी कम यानी लगभग तीस प्रतिशत है। भारत में जहां लगभग 30 प्रतिशत है जो चीन में 75 प्रतिशत तक है।

चीन के कामगार 14 साल पढ़ते हैं जबकि भारतीय श्रमिक आठ साल से भी कम पढ़ते हैं। इस तरह देखें तो भारत में कामगारों के लिए माहौल बनाना कठिन है और बिना श्रमिक कौशल के हमारे तरक्की के प्रयास विफल हो सकते हैं।

महिला-पुरुष अनुपात भी भारत के लिए चिंता का विषय है और हमारे यहां भी जन्म दर कम होती जा रही है। एक तथ्य यह है कि जहां शिक्षा का स्तर बढ़ा वहां प्रजनन दर में कमी आई है। यही हालत रहे तो भारत में बुजुर्ग आबादी और घटते कार्यबल की चुनौती का सामना करना होगा।

चीन का आबादी पैटर्न है भारत के लिए सीखचीन के सामने जो चुनौतियां हैं उनमें आबादी के पैटर्न की समस्या सबसे बड़ी है। यहां बुजुर्गों की आबादी ज्यादा है और जन्म दर बेहद कम हो चुकी है। महिला-पुरुष अनुपात असंतुलन भी है।

एक समय में यह दौर जापान देख चुका है जब 90 के दशक में यहां तीन दशकों तक हालात ठीक नहीं थे। जापान अब थोड़े सुधार पर है लेकिन वहां भी बड़ी उम्र के चलते उत्पादकता प्रभावित हुई है. चीन की चिंता इसलिए बड़ी है क्योंकि उसका दायरा बहुत बड़ा है.

जापान में 1990 के दशक से लगभग 12.5 करोड़ की स्थिर आबादी है। यहां का कार्यबल भी लगभग 6.9 करोड़ के स्तर पर स्थिर है लेकिन उम्रदराज होने की वजह से समय के साथ लोगों की उत्पादकता कम हो गई है। चीन में 1.4 अरब लोग हैं और उनमें कार्यशील लोग 75 करोड़ हैं। चीन में अगले 10 साल में उम्र के चलते 5 करोड़ आबादी से कम होंगे और अगले पच्चीस साल में लगभग 10 करोड़ लोग वृद्ध मौत होंगे। ऐसे में कार्यबल में तेजी से कमी आना तय है।

चीन कभी उच्च आमदनी के स्तर तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो सका क्योंकि यहां बुजुर्ग ज्यादा हैं।

इन सबसे भारत को सबक लेने चाहिए। भारत में महिलाओं की कार्यशील भागीदारी कम यानी लगभग तीस प्रतिशत है। भारत में जहां लगभग 30 प्रतिशत है जो चीन में 75 प्रतिशत तक है।

चीन के कामगार 14 साल पढ़ते हैं जबकि भारतीय श्रमिक आठ साल से भी कम पढ़ते हैं। इस तरह देखें तो भारत में कामगारों के लिए माहौल बनाना कठिन है और बिना श्रमिक कौशल के हमारे तरक्की के प्रयास विफल हो सकते हैं।

महिला-पुरुष अनुपात भी भारत के लिए चिंता का विषय है और हमारे यहां भी जन्म दर कम होती जा रही है। एक तथ्य यह है कि जहां शिक्षा का स्तर बढ़ा वहां प्रजनन दर में कमी आई है। यही हालत रहे तो भारत में बुजुर्ग आबादी और घटते कार्यबल की चुनौती का सामना करना होगा।

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