December 1, 2023
रोचक / प्रेरकलाइफस्टाइल

हिटलर के अनसुने पक्ष बताती एक किताब

हिटलर का कोई दोस्त भी था, यह तथ्य ही अपने आप में चकित करने वाला है लेकिन सच यही है कि न सिर्फ उसका एक दोस्त था, रूम मेट था, राजदार था और उसने एक किताब भी लिखी है. ‘द यंग हिटलर आई न्यू” और उसका नाम था ऑगस्ट कुबिजेक। 

ऑगस्ट ने क्या कुछ नहीं लिखा उन दिनों के बारे में जब हिटलर फ्यूहरर नहीं था बल्कि एक ऐसा व्यक्ति था जो बेघरों के लिए बनाये घर में रहने वाला था और यह कहानी तभी तक की कही गयी है जब हिटलर ने कदम फ्यूहरर बनने की तरफ कदम बढ़ा लिए थे. इस पूरे वर्णन तीन बातें आपको यह सोचने के लिए मजबूर करती हैं कि यदि ऐसा हो जाता तो क्या दुनिया एक भयानक दौर से गुजरने से बच सकती थी. पहला यह कि जहाँ हिटलर रहता था वहां से कुछ ही दूरी पर सिग्मंड फ्रॉयड का भी बसेरा था और यदि ख़ुदा न खास्ता ये दोनों मिल जाते तो शायद कुछ अलग हो जाता। दूसरा यह कि हिटलर से एक किलोमीटर से भी काम के दायरे में स्तालिन भी रहा करते थे और यदि भूले से भी ये दोनों मिल लेते तो क्या हो सकता था. तीसरी संभावना यह थी कि किसी अच्छे दिन तीनों ही आपस में मिल लेते तो क्या दुनिया का खाका बदला हुआ होता? 

 “जो ये होता तो क्या होता” वाली तर्ज पर जाएँ तो इन संभावनाओं से भी पहले की एक सम्भावना है और वह यह कि जिन खूबसूरत स्केचेस को लेकर हिटलर विएना से आर्किटेक्ट बनने गया था, उन्हें तारीफ मिल जाती और यदि उनके दम पर एडमिशन ही मिल जाता तो दुनिया ऐसी त्रासदी से बच जाती जिसका नाम फ्यूहरर था. मगर ये हो ना सका बल्कि हुआ यह कि ऑगस्ट को हिटलर ने अपनी प्रेमिका की खबर देते रहने का का काम सौंप कर विदा ले ली इसके बाद दोनों दोस्त मिल नहीं पाते हैं और यही वह जगह है जहाँ से एक तानाशाह पैदा होता है. इससे पहले ऑगस्ट एक महत्त्व वाले समय की जानकारी दे देते हैं और यह वह समय था जिसने हिटलर में फ्यूहरर बनने के बीज डाले, उसमें तानाशाह बनने के अंकुरण डाले और वह राह तय की जिससे वह दुनिया भर के रास्ते बदलने वाला व्यक्ति सका. स्टीफनी नाम की वह शायद यहूदी लड़की ही थी जो हिटलर के दिल में धड़कन की तरह बसी थी और किसे खबर कि एक यहूदी लड़की को न पा पाने का ही परिणाम लाखों यहूदियों ने इस तरह भुगता हो. कम से कम ऑगस्ट को तो यही महसूस हुआ कि एक समय तो उसकी बड़ी चिंता यही थी कि वह लड़की के पिता से क्या कह कर अपनी प्रेमिका का हाथ मांगने जाए. वह सड़कों पर जहाँ से निकलता वहां की हर बिल्डिंग को लेकर उसकी अपनी कोई राय जरूर होती और कुछ के बारे में तो यह राय होती थी कि इसे गिरा ही दिया जाना चाहिए क्योंकि इसमें सुंदरता का कोई कोण ही नज़र नहीं आ रहा. यह राय कुछ ऐसी इमारतों के लिए भी होती जिन्हें बाकी लोग खूबसूरत कहते. जब खुद को अच्छा कलाकार और आर्किटेक्ट मांनने वाले हिटलर को इस तरह पहचानने से इंकार किया गया तो उसे लगने लगा कि पूरे सिस्टम को ही बदल दिए जाने की जरूरत है और सिस्टम को बदलने की आग वह वहां से तो ले ही सकता था जो उसे कमतर साबित किये जाने से पैदा हुई थी.