May 25, 2024
देश दुनियारोमांचक

एक अपहरण जिसने अटका दिया ग्रीन एनर्जी का विकास

विश्व में ग्रीन एनर्जी को लेकर पिछले कुछ समय में काफ़ी जागरूकता आई है लेकिन सौ सवा सौ साल पहले की एक घटना के बारे में जानकर् आपको पता चल सकेगा कि आख़िर इसमें इतना समय क्यों लगा जबकि प्रयोगों का दौर तो काफ़ी पहले शुरू हो चुका था. दरअसल कनाडा के आविष्कारक जॉर्ज कोव 1905 में ही वे सोलर पेनल बनाने में काफ़ी हद तक कामयाब हो गये थे जिनके आधुनिक रूप हम घरेलू पैनल बतौर इस्तेमाल करते हैं. कोव चाहते थे कि सुबह जब सूर्य की किरणें न भी तब भी काम चलता रहे और इसके लिए वे प्रारंभिक बेटरी का भी प्रयोग कर चुके थे. उनके प्रयोगों की गति यदि वैसी ही चलती रहती तो शायद हम आज जितनी गैर परंपरागत एनर्जी बना रहे हैं उतनी पचास साल पहले ही बनाने मे सफल हो जाते लेकिन यहीं एक पेंच आ गया. 19 अक्टूबर 1909 को कोव का अपहरण कर लिया गया. कोव तब तक अपनी कंपनी सन इलेक्ट्रिक जेनरेटर कॉर्पोरेशन को उस समय की कीमती कंपनी बना चुके थे. न्यूयॉर्क स्थित इस कंपनी की कीमत 5 मिलियन डॉलर आँकी गयी थी यानी आज के हिसाब से लगभग 200 मिलियन डॉलर. इतनी बड़ी कंपनी के मुखिया का अपहरण करने वालों ने न उनसे पैसे माँगे और न कोई अन्य शर्त रखी लेकिन उन्हें कह दिया गया कि वी अपना सोलर पेटेंट छोड़ दें और कंपनी का कामकाज बंद कर दें. रिहाई के लिए यह एक अजीब शर्त थी सोलर पेटेंट छोड़ कर कंपनी बंद करना एक बड़ा फ़ैसला था. रिहाई के समय तो यही बताया गया कि कोव ने अपहरण करने वालों की शर्तें मानने से मना कर दिया था लेकिन बाद में यही देखा गया कि सोलर एनर्जी के लिए चल रहे उनके शोध भी रुक गये और धीरे धीरे कंपनी के कामकाज भी बंद हो गये. माना तो यही जाता है कि यदि कोव के साथ अपहरण की घटना नहीं हुई होती तो शायद आज सोलर एनर्जी को लेकर दुनिया काफ़ी आगे होती.