January 14, 2026
दर्शनसाहित्य

Hindi Poem

रिश्तों की बारीक बारीक डोरियां
कभी उलझी,कभी सुलझी कभी हाथ से फिसली…
कभी अपने मन की अंगुलियों से कस ली…

Hindi Poem डोरियां