कमलनाथ सरकार के फैसलों की जांच के लिए शिवराज सरकार ने गठित की कमेटी

कमलनाथ सरकार के फैसलों की जांच के लिए शिवराज सरकार ने गठित की कमेटी

ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के सदस्यों में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए तुलसी सिलावट भी शामिल हैं, जो खुद तत्कालीन कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उस वक्त की सरकार द्वारा लिए गए कई फैसलों में शामिल थे. ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, जल-संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और कृषि मंत्री कमल पटेल शामिल हैं.

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कमलनाथ सरकार के आखिरी 6 महीने के दौरान लिए गए फैसलों की जांच के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स का गठन किया है. ग्रुप और मिनिस्टर्स 20 मार्च 2020 से 6 महीने पहले तक की अवधि में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा लिए गए फैसलों की समीक्षा करेगा.

देखने वाली बात यह है कि इस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के सदस्यों में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए तुलसी सिलावट भी शामिल हैं, जो खुद तत्कालीन कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उस वक्त की सरकार द्वारा लिए गए कई फैसलों में शामिल थे. ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, जल-संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और कृषि मंत्री कमल पटेल शामिल हैं.

शिवराज के ये मंत्री समीक्षा के दौरान कथित भ्रष्टाचार की भी जांच करेंगे. कमलनाथ सरकार द्वारा आखिर के 6 महीने में लिए गए फैसलों की समीक्षा के बाद शिवराज सरकार जरूरत पड़ने पर उसे रद्द भी कर सकती है या फिर बदलाव कर सकती है. आपको बता दें कि कमलनाथ सरकार द्वारा मार्च में कई नियुक्तियां भी की गई थीं, जिसकी शिवराज सिंह चौहान ने राज्यपाल से शिकायत भी की थी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कमलनाथ सरकार के आखिरी 6 माह के फैसलों की समीक्षा के लिए कोरोना के भीषण संकटकाल में शिवराज सरकार द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस हर तरह की समीक्षा और जांच का स्वागत करती है, लेकिन अभी समय कोरोना से निपटने का है, राजनीति के लिए तो बहुत समय है.

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार प्रदेश में कोरोना से बिगड़े हालात संभाल नहीं पा रही है. लिहाजा प्रदेश में संक्रमित लोगों की संख्या और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. शिवराज सरकार इस संकट में अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए कमलनाथ सरकार के फैसलों की जांच करा रही है.

सलूजा ने इस समिति के सदस्यों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इनमें से एक सदस्य के खिलाफ पूर्व में ई-टेंडर से लेकर स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों तक में उनकी भूमिका को लेकर जांच चल रही है. वहीं एक सदस्य पिछली सरकार में खुद मंत्री थे और कोरोना महामारी के दौरान प्रदेशवासियों को छोड़कर बेंगलुरु के फाइव स्टार रिजॉर्ट में चले गए थे. लिहाजा अब इनसे समीक्षा की क्या उम्मीद की जा सकती है?

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