कोरोनावायरस : रूस ने चीनी नागरिकों के देश में आने पर रोक लगाई, चीन में अब तक 2004 लोगों की मौत

कोरोनावायरस : रूस ने चीनी नागरिकों के देश में आने पर रोक लगाई, चीन में अब तक 2004 लोगों की मौत

रूस ने मंगलवार को कहा है कि वह 20 फरवरी से चीनी नागरिकों को देश में आने से रोक देगा। स्थानीय न्यूज एजेंसियों ने स्वास्थ्य मामलों को देख रहे उप प्रधानमंत्री तातियाना गोलीकोवा के हवाले से बताया कि रूस में पढ़ाई, रोजगार, निजी यात्रा और पर्यटन के लिए आने वाले चीनी नागरिकों पर रोक लगाई गई है। उन्होंने बताया कि यह फैसला चीन में गंभीर होती स्थिति को देखते हुए लिया गया है। रूस और चीन करीब 4250 किमी सीमा साझा करते हैं। रूस में दो महिलाओं की कोरोनावायरस रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वहां अब कोई संक्रमित नहीं बचा है। 

चीन में कोरोनावायरस से मौतों का आंकड़ा 2 हजार के आंकड़े को पार कर गया है। बुधवार को इससे 136 लोगों की मौत हुई। यह एक दिन में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा संक्रमितों की संख्या 74,185 तक पहुंच गई है। चीन के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 136 में से 132 मौतें हुबेई प्रांत में हुईं। यहीं सबसे पहले कोरोनावायरस का मामला सामने आया था। 

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में 1185 संदिग्ध मामलों की जानकारी सामने आई है। वहीं 11,977 मरीजों की हालत गंभीर है। अब तक 1824 लोगों को रिकवरी के बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। बुधवार को चीन के अलावा हॉन्गकॉन्ग और ताइवान में एक-एक मौत हुईं। 

चीन में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने में अब सरकार वायुसेना की मदद लेगी। एविएशन इंडस्ट्री में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को देखते हुए सरकार ने इस मुश्किल काम के लिए वायुसेना से संपर्क किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से निर्देश मिलने के बाद वायुसेना अपना सी-17 ग्लोबमास्टर वुहान भेजेगी। यहां से भारतीय नागरिकों को निकाला जाएगा। 

चीन में कोरोनावायरस संक्रमितों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने फरवरी की शुरुआत में ही भारतीयों नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया था। एयर इंडिया के विशेष विमान से दो बार में अब तक 647 नागरिकों को निकाला जा चुका है। इनमें से 248 को मानेसर स्थित आर्मी कैंप में रखा गया था। मंगलवार को सभी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्हें घर जाने के निर्देश दिए गए।

पहले दो दौरों पर जब भारतीय नागरिक वापस लाए गए, तो सभी कॉन्ट्रैक्टरों ने क्वारैंटाइन (मरीजों को अलग-थलग रखने की जगह) बेस बनाने में सेवा देने से इनकार कर दिया था। इलेक्ट्रीशियन और प्लंबरों ने भी आखिरी समय में मदद से इनकार कर दिया था। हालांकि, तब सेना ने खुद ही पीड़ितों को अलग रखने के लिए बेस तैयार कर लिया। आगे भी सेना ही चीन से लाए गए नागरिकों के लिए बेस तैयार करेगी।

सेना में मेजर जनरल आर दत्ता ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा, “हम भारतीय सेना के जवान हैं। हम कभी पीछे नहीं हटते। हमने सिर्फ दो दिन में क्वारैंटाइन जोन बना दिया था। सभी छात्रों को यहां रखा गया। वे कोरोनावायरस से पीड़ित नहीं पाए गए, इसलिए उन्हें भेज दिया गया।”

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